इन दिनो चिठ्टा जगत मे घूमने का चस्का सा लग गया था.पिटारा टूलबार के रहते हिन्दी चिठ्टा जगत की खाक छानना आसान हो गया है। बहुत रोचक सामग्री पढ्ने को मिली.लोग खूब लिखतें हैं और क्या खूब लिखतें हैं। अपने तो ये हाल है कि पढ के बेहाल हैं।विषय वस्तु का इतना विशाल भन्डार कि ऐसा लगे मानो किसी बडे डिपार्ट्मेन्टल स्टोर में आ गयें हो।
कलम को दस्त लगते मैने इन्टरनेट पर ही देखा और मैं हूं की कब्ज से परेशां हूं।
एक बात बडी शिद्दत से समझ आई । ये लिखने वाले भी बडे कुत्ती चीज होते है।मैं लिख रहा हूं तू पढ और तारीफ़ में कमेन्ट वाली जगह भर दे।तू लिखेगा तो मै भी अपना फ़र्ज़ निभाते हुए एक अच्छा सा कमेन्ट तेरे बारे मे लिख दूंगा।मै तुझे फ़ालो करुंगा और तू मुझे फ़ालो कर। ऐसे २५-५० चाहने वाले बन जाये तो अपनी तो बन आये।ईतनी बार या यूं कहें कि बार बार एक दूसरे की साईट पर सर्फ़ करेंगे तो गूगल का सर्च ईंजन भी अपने इस मकडजाल मे फ़स जायेगा और फ़िर भोले भाले युजर्स को भी अपने चिठ्टा जगत मे फ़ांस लेगा।
अभी इतना ही क्योंकि आप तो जानते ही हैं ----मेरी समझदानी का छेद छोटा जो है.............
शुक्रवार, 6 नवंबर 2009
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